धज्जियां नहीं बिल्कुल नहीं, ये कोई सोची समझी साजिश बिल्कुल नही थी। ये संयम जो अब काबू में ना रह सका ये उसका परिणाम है। ये परिणाम है सरकार की उन विफलताओं का जो ये कहते रहे कि whstapp पर अफवाहों पर रोक लगाएंगे परन्तु ट्रेन चलने को लेकर जो अफवाह चली हुई थी उस पर कभी ध्यान नही दिया।  कोरोना महामारी को रोकना प्राथमिकता होनी चाहिये और है भी परन्तु योजनाबद्ध तरीके से इसे लागू नही किया गया इसकी आज भी कमी खलती है। लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए लोगों का ही ध्यान न देना भी सरकार की कमी है।  करीब 3000 लोगों का स्टेशन तक पहुच पाना ही एक विफलता है। दूसरी विफलता इन तक पर्याप्त और खाना पानी जैसी सुविधाओं का ना पहुँचना। क्योंकि अगर पहुचता तो पहुँचाने वाले को ये जरूर पता होता कि ये लोग कुच करेंगे।
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