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माँ

जन्म देने से पालने, बड़ा करने, सिखाने, और मातृत्व का प्यार देने वाली हर उस स्त्री को नमन। मेरी जिंदगी में मेरी माँ और जिंदगी में आई हर वो स्त्रीशक्ति को मेरा नमन जिसने मुझे पुत्र जैसा प्यार दिया, हौंसला दिया, प्यार दिया, उम्मीद दी और जीने के लिए सांसे दी। हम सब के भीतर , चाहे हम कितने ही बड़े हो जाएं , परन्तु एक बचपन जिंदा रहता है परंतु वह भी तब तक जब तक उसकी जिंदगी में माँ का अस्तित्व है क्योंकि उस बचपन को जिंदा रखने में माँ का ही अहम योगदान होता है माँ के चलते हम यह महसूस नही करते कि हम बड़े भी हो रहे हैं वरना बिना माँ के मासूम चेहरों पर से बचपन को गायब होते देखा है मैंने। सोचा कुछ लिखूं , फिर सोचा सिर्फ माँ लिखू परन्तु लिखने लगा तो शब्द के आगे लेखन भी कम पड़ जाए इतना कुछ है माँ के लिए। कहने को एक शब्द है "माँ" परन्तु सारे शब्द इस शब्द के पीछे, और इसी शब्द के पीछे खूबसूरत सा संसार। इस दुनिया मे हर प्रेम , हर रिश्ता जब किसी न किसी वजह से फीका पड़ चुका होगा, मातृत्व का प्रेम तब भी अपना परचम लहराएगा। सारी दुनिया बोलती है, बड़ा हो गया है कुछ कमाया कर। सिर्फ "माँ"है ...